जल संरक्षण और एकल उपयोग प्लास्टिक का उपयोग न करने का लिया संकल्प

नदियां जीवंत रहेगी तो तीर्थ रहेंगे-स्वामी चिदानन्द सरस्वती


ऋषिकेश।


 परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष एवं ग्लोबल इण्टरफेथ वाश एलायंस के संस्थापक स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज और प्रेम स्वामी श्री मधुसूदन नायडू जी ने विश्व के विभिन्न देशों से हजारों की संख्या में परमार्थ निकेतन मंे साधना हेतु आये अनुयायियांे को वर्ष 2021 में होने वाले हरिद्वार कुम्भ में सहभाग हेतु आमंत्रित किया।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज ने कहा कि आप सभी विश्व के अनेक देशों से माँ के दर्शन के लिये आते है। वर्तमान समय में गंगा सहित अन्य नदियां प्रदूषित हो रही है। अगर नदियां इसी तरह प्रदूषित होती रही तो नदियांे के तटों पर बसे हमारे तीर्थ भी नहीं रहेंगे? इसलिये हमें जल को बचाने का पूरा प्रयास करना होगा। उन्होने कहा कि सभी धार्मिक संस्थायें और जन समुदाय को मिलकर वैश्विक स्तर पर पर्यावरण एवं जल प्रदूषण की समस्याओं को स्वीकार करते हुये उसके समाधान के लिये सभी को मिलकर प्रयत्न करना एवं इसके लिये जन समुदाय को जागरूक करना होगा है।'
प्रेम स्वामी श्री मधुसूदन नायडू जी ने कहा कि 'पूज्य सत्य साई बाबा ने 'लव आॅल, सर्व आॅल, अर्थात सबको प्यारा करो, सबकी सेवा करो' का जो सूत्र दिया है। उन्होने कहा कि जैसे देवप्रयाग, कर्णप्रयाग, रूद्रप्रयाग आदि प्रयाग है वैसे ही आज ऋषिकेश में गंगा के पावन तट पर परमार्थ निकेतन एवं सत्य सांई संस्था के बीच एक ऐसा अपनत्व, स्नेह एवं सेवा का रिश्ता कायम हुआ, आज यहां प्रेम प्रयाग का अवतरण हुआ। परमार्थ गंगा तट से एक विशेष लगाव है, यहां कि दिव्यता अद्भुत है।
प्रतिवर्ष परमार्थ गंगा तट पर परमार्थ निकेतन और सत्य सांई संस्था का एक अनोखा संगम होता है। यह भी अन्य संगम और प्रयाग की तरह धार्मिक प्रयाग है; धार्मिक संगम है। यह हरितिमा संवर्धन, विश्व कल्याण और शान्ति की स्थापना का संगम है।
स्वामी जी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, श्री मधुसूदन नायडू जी, साध्वी भगवती जी और अन्य सभी अनुयायियांे ने जल स्रोतों के संरक्षण एवं एकल उपयोग प्लास्टिक का उपयोग न करने का संकल्प लिया।